बदलाव कभी दर्दनाक नहीं होता,
केवल बदलाव का विरोध दर्दनाक होता है।
बुद्ध
सबका ख़ुशी से फासला एक कदम हैं ,हर घर में बस एक ही कमरा कम हैं ..
~ जावेद अख्तर
हकीकत से सामना हुआ तो पता चला..
लोग तो सिर्फ़ बातों से अपने थे..!!
खुद को कम बताकर तो देखोसामने वाले को अपनी औकात बताने में देर लग जाए तो कहना…..
नोट- यहाँ "औकात" से तात्पर्य केवल धन से तो बिल्कुल भी नही है॥
बातो की मिठास अंदर का भेद नहीं खोलती, मोर को देखकर कौन कह सकता है ये सांप खाता होगा..!!
जिंदगी की परीक्षा भी कितनी वफादार है,
उसका पेपर भी कभी लीक नहीं होता।
जिन्हें तक़दीर रुलाना चाहती है ,उन्हें बेकदर से इश्क़ हो जाता है।।
मै खुदकुशी से मर जाऊंगी,उससे कहना हादसे में जान गई.
अच्छे निर्णय लेना अनुभव से आता है,
और अनुभव बुरे निर्णय लेने से आता है।
अपनी आग को ज़िंदा रखना कितना मुश्किल है, पत्थर बीच आईना रखना कितना मुश्किल है...
मन्नतों के धागे बांधो या बांधो मुरादों की पर्चीवो अपना नम्बर देगी तभी जब होगी उसकी मर्जी
खुद को श्रेष्ठ खुद नही, औरों को करने दो
खुद कहोगे तो मान नही अभिमान झलकेगा।
मुजरिम हो गया इस कद्र खुद की नजरो में
स्वाभिमान छोड़ प्रेम ढूंढ रहा था पत्थरों में
खुदा को मना रहे हैं लोग,
खुदा के बंदों का दिल दुखा कर !
टूटते हुए रिश्तों को बचाइए,
बिना बुलाए अपनों के घर जाइए,
फल-मिठाई ना सही,
कम से कम टमाटर ही ले जाइए।
सिर्फ एक दिल ही है जो बिना,आराम किये सालों काम करता है,इसे हमेशा खुश रखिये ,चाहे ये आपका हो या आपके अपनों का !
कुछ ग़लत पते,
हमें आजीवन के यात्री बना देते है।
सबको जानने की कोशिश मेंमैंने खुद को खुद से अपरिचित देखा है
~पूजा लोधी
हमने जिनके लिए दुआ मांगी,वो गैरों की दुआओं के तलबगार निकले,
जिनकी ख़ातिर इक वक्त में खुदा थे हम,अब हम उनकी ही नज़रों में गुनहगार निकले
जिन्होंने कभी लाख अच्छाइयां गिनाई थीं मुझमे,अब हम उनकी खातिर महज़ बेकार निकले…!!
हम भी दरिया हैं,हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे,रास्ता हो जाएगा.
बशीर बद्र