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दिलों के ताले की चाबी लफ्ज़ में नहीं लहजे में होती है !

खलल पड़ता है मेरी नींद में मुर्शदजब कोई ख्याल मेरे ज़हन पर हावी होता है

मन्दिर तक पहुंचना तन का विषय है, लेकिन शिव तक पहुंचना मन का विषय है …

हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्तबस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह

बड़ी चालाकी से खेल गया वो एक शख़्स जो मेरी ज़िंदगी है…. धोखा भी मुझे दिया और धोखेबाज भी मुझे कहा..!!

वफा के रश्मों रिवाजों को बहुत देखा जमाने में निभाने का हुनर तो बस किताबों में होता है.. प्रज्ञा शुक्ला

इंसां तिरे वुजूद का मक़सद ही इश्क़ था, तू नफ़रतों की राह में कैसे भटक गया ?

यकीन है "भगवान" पर, यमदूत के रूप में हमारे "पर" आएंगे, तब इस बेदर्द "जमाने" को, हम भी "उड़" कर कर दिखाएंगे..!! विरक्ति

बईमानी भी तेरे इश्क ने सिखाई है,तू पहली चीज है जो मेने मां से छुपाई है

रिश्तें गर बंधे हो “दिल” की डोरी से तो दूर नहीं होते किसी भी “मजबूरी” से....!!

मर्द बेईमानी करे तो मास्टरमाइंडऔर औरत करे तो धोखा

उम्मीद कम रखिए,खुशियां बेहिसाब होंगी !

महीनों की आहट में मोहब्बत करते हैं लोग ,, और दिनों के रिवाज में रिश्ते निभाते हैं लोग..!!

दाग़ जब चरित्र पर हो तोफिल्टर लगाने से साफ नहीं होते…..!!

आज शायद मुझे लगाले वो गलेईद का तो बहाना उसके पास है

हर व्यक्ति के जीवन में कोई कमी जरूर रह जाती है। ताकि वह समझ सके कि दुनिया इंसान नहीं ऊपर वाला चलाता है !

अपना हुस्न संभाल कर रखो मैं इस‌ हुस्न पर दुपट्टा डालूंगा

सच की तपस्या से बेहतर है, झूठ से सन्यास ले लिया जाए.

मेरा लिखा ना तो कोई कविता है,ना कोई कहानी मेरे द्वारा लिखा गया बस, मेरे अतीत की क्षतिपूर्ति मात्र है…!

तुम्हें याद करके सोने की आदत थीआज तुम्हें याद करके रोने की आदत हो गई


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