लैलाओं को महलों का दुःख होता है,चौराहों पर मजनू पत्थर खाते हैं.
मोहब्बत मेरी आख़री शरारत थीफिर यूं हुआ के मैं बचपन से निकल आया….!
हर समस्या का समाधान होता है…तो अब इस समस्या का समाधान क्या है ?
ये कलयुग है साहब यहाँ क़सम खाने वाले नहीं,दारू पीने वाले सच बोलते है !!
रखने की बस ये तीन ही चीज़ें हैं इन दिनों,
हिम्मत रखो यक़ीन रखो और फ़ासला रखो।
पढ़ तो लेते है सब मुझे अच्छे से
बस समझते है अपने नज़रिए से..!
कल तक जो अपनी बहन की पढ़ाई के खिलाफ़ था, आज वह अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए लेडी डॉक्टर ढूंढता है।
क्रोध सदैव दूसरे को कम
और
स्वयं को ज्यादा हानि पहुंचती है !!!
वक़्त बदल गया है अब बेटियाँ नहीं, बेरोजगार लड़के माँ-बाप के कंधों पर बोझ होते हैं।
जैकी यादव
नूर दिखेगा नही चहरे पर
ना होगी चमक आंखों में
एक दफ़ा आईने में देखो खुद को
कितना फरेब छुपा है बातों में
कितना,और कितना बोलोगे झूठ ख़ुदसे...
हो ही नही सकता की खुशी मिलती हो खैरातो में
स्वीकारो तो...
पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है ,मगर प्यार और संस्कार नहीं ...
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझेमेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहींमेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हेंमेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं
इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया है मुझ परइन में...
तुम्हारे जुल्मों का हिसाब लिखूं
सोच रहा हूँ
इश्क़ पर एक किताब लिखूं...
जो चीज वक्त पर ना मिले ,
बाद मिले या ना मिले क्या फ़र्क पड़ता है...
मुझे खुद को बचाने की कभी कोई इच्छा नहीं रही और मैंने कभी भी इसके बारे में गंभीरता से नहीं सोचा
~अमर शहीद भगत सिंह❣️ #जयहिंद 🇮🇳
हाफ़िज़ ए खुदा परे हट जाये मर्ज़ तेरे बूते का है हि नहींसाकि के मयखाने के सिवाग़म की कोई दवा नहीं होती ।।
कभी इरादा हो हमे छोड़ के जाने का तो पहले बता देना…क्योकि,अचानक के हादसे बेमौत मार देते है..!
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती हैआज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
~ शकील बदायुनी
नाराज़ हो जाते हैं अब वो साहब
जब जवाब हम उन्हें उनके ही लहज़े में देते हैं
जिस दिन धरती से छिपकली, कॉकरोच और चूहे खत्म हो जाएंगे,उस दिन धरती पर स्त्रियों का पूर्ण शासन होगा.