पढ़ तो लेते है सब मुझे अच्छे से
बस समझते है अपने नज़रिए से..!
पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़ै सो पंडित होइ॥
कबीर दास
समस्या रोने-धोने से दूर नहीं होती।
समस्या तब हटती है,
जब आप बहादुरी से सामना करते हैं।
प्रेम से बढ़कर त्याग हैदौलत से बढ़कर मानवतापरन्तु सुंदर रिश्तों से बढ़करइस संसार मे कुछ भी नहीं !!
उदासी में कुछ पल जन्नत में जिओगे क्या,चाय बना रहा हूं अदरक वाली पिओगे क्या ?
मौत आज़मा रही थी परिंदे को,
ईश्वर भी करामात दिखा रहा था
दम तोड़ रही थी इंसानियत,
जब उसे इंसान मरना सिखा रहा था
✯||तारीफो में कमी नहीं होगी जानतुमने शायर को पटाया हैं किसी छपरीको नहीं…||✯
भरोसे का पात्र नहीं रहता वो व्यक्ति ,जो भावनाओ के साथ खेल गया हो !!
पता नहीं क्यों सब बीवी से डरते हैँ
मैं तो किसी की बीवी से नहीं डरता
भूल गए है कुछ लोग हमे इस तरह..
यकीन मानो यकीन ही नही आता !
किसी रोज सुबह का कुछ ऐसा नजारा हों
खुलें जब ऑंखें सामने चेहरा तुम्हारा हों.!
भिन्न मत का मान रखो, गलत का नहीं
जिंदगी भर डर डर के रिश्तों को,
निभाने से बेहतर है अलग हो जाना...
उसे बारिश का मौसम अच्छा लगता था , मुझे उसके साथ बारिश मे भींगना !!
होशवालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है ...
जैसे जैसे उम्र गुजरती है हमें अहसास होता है कि
माता पिता हर चीज़ के बारे में सही कहते थे!
अगर मैं सबके जैसा होता,
तो यकीन करो इतना परेशान ना होता...
हाल मत पूछो जिंदगी का हमसे ,हालात इस कदर गुमनाम है ,की उम्र जीने की है औरमौत आस पास खड़ी है…!!
छोटी नदी को उमड़ते देर नहीं लगती
मुंशी प्रेमचंद
मैं बेरागी हूं… महादेव नहींपर तुम्हारी काया से अधिक तुम्हारी आत्मा को चाहूंगा..!
मैं प्रेमी हूँ… कान्हा नहींपर तुम्हारे नाम को सदैव अपने आगे लगाऊंगा..!
मैं मर्यादित हूं… श्रीराम नहींपर तुम्हारे अलावा मैं किसी और का न हो पाऊंगा..!