रफ्फू ना कर इसे ए दर्जी खुदा के लिए
की दिल के सुराख से हवा खुश ग्वार आती है
थक चुका हूं इन पुराने अल्फ़ाज़ों से खेलते खेलते,
तुम मेरे दिल से खेल कर एक नया शब्दकोश उपहार कर दो..!!
यूँ बरसती हैं तसव्वुर में पुरानी यादेंजैसे बरसात की रिम-झिम में समाँ होता है
~क़तील शिफ़ाई
ज्ञान में पूंजी लगाने से सर्वाधिक ब्याज मिलता है।
~बेंजामिन फ्रैंकलिन
मुझसे मेरे मिजाज़ का आलम न पूछिये ,
क़ातिल को ख़ुद दिया है हमने कलेजा निकाल के ..!!
वक्त का तकाजा देखिए
महसूस कीजिए
हो रहा रदोबदल
कुछ अच्छे कुछ बुरे
महसूस तो कीजिए
दौर था सुनहरा
आपस की सहभागिता
एक दूजे का साथ
न जातीय विभेद
बदला बदला आबो हवा
बढ़ गई दूरियां
अलग थलग राग लिए
जातीय...
समय बहुत कीमती है इसीलिए ,अपना नहीं दूसरों का बर्बाद कीजिए !!
इतना दानी नहीं समय जोहर गमले में फूल खिला दे,इतनी भावुक नहीं ज़िन्दगीहर ख़त का उत्तर भिजवा दे,
~ गोपालदास नीरज
सांसें उधार ले के गुज़ारी हैं जिंदगी
हैरान वो भी थी कि मैं मर क्यूं नहीं गया
मैं बागी रहूंगा हमेशा उन महफ़िलों का।
जहां शौहरत तलवे चाटने से मिलती हो।।
मतलब के बिना कौन पूछता है किसी कोबगैर रुह के तो घर वाले भी नहीं रखते
निकले हैं वो मेरी शख्सियत तराशने,
जिनके खुद के किरदार मरम्मत मांग रहे है।
व्यापार हो या व्यवहार उन्हीं लोगों से रखो ,
जिनकी जान से ज्यादा जुबान की कीमत हो ..!!
अक्सर इत्तेफाक से मिलने वाले,मर्ज़ी से बिछड़ जाते हैं !