रिश्ते उन्ही से रखो जो समय आने पर ,
सहयोग और प्यार दिखाए' औकात नही ...
चलो कल्पनवाओं का सैर करे
दुनियां के भीड़ से पार चले
उन्मुक्त भाव उड़ने के चाह भरे
मन के उम्मीदें पे पंख जड़े
होले होले दुनियां से पार चले
जन्नत के चौखट पे पग रखे
अलग ही जहां का दीदार करे
होगी अनुभूति जो ख्याल करे
चांद...
किसी को बीच सफर में छोड़ने वालों ,तुम्हें मंजिल नहीं नसीब होगी
आजमाना उसकी वफ़ा के बाद गैरों को,देखना….तुम्हें फिर वो, मोहब्बत नहीं नसीब होगी…!!
आदमी जब थक जाता है
स्त्री को ढूँढता है
आदमी जब ऊब जाता है
स्त्री को ढूँढ़ता है
आदमी जब टूट जाता है
स्त्री को ढूँढता है
इसे दूसरे तरीक़े से कहें तो
थके,
टूटे,
ऊबे हुए आदमी को
सिर्फ़ स्त्रियाँ...
रहीसियत कि "रकम" से जाहिलों को "सरताज" बनते देखा है,
मैंने आज "हुनर" को नंगे पांव "तांत" पर उछलते देखा है..!!
किरदारों कि लेप चढ़ी है,
जिसे जैसा चाहिए बन जाता हूं,
सबको खुश रखने के चक्कर में,
मैं अंदर से छन जाता हूं..!!
ज़िन्दगी के "पन्नों" में मेरा किरदार भी "जोकर" का रहा,
मैं "हंसा" तो भी लोग हंसे मैं "रोया" तब भी लोग हंसें..!!
हर तरफ से असफल व्यक्ति ही,
सबसे उत्तम शिक्षक होता है।
जब तक इंसान मजबूत नही होता,तब तक इंसान मजबूत नहीं होता ।
व्यापार हो या व्यवहार उन्हीं लोगों से रखो ,
जिनकी जान से ज्यादा जुबान की कीमत हो ..!!
गांव के लोग पढ़े लिखे नहीं होते दोस्त ,
उनकी खूबी है कि बस प्यार बहुत करते हैं ।।
परत चढ़ी है लाचारी की, आंखों से बहती अश्कों कि धार है,
सिकुड़ रही हैं आंतें भूख से, लेकिन मिलती सिर्फ दुत्कार है..!!
जो निशुल्क है वही सबसे ज़्यादा कीमती है,नींद शांति हवा और हमारी सांसें….
अच्छा होने से पहले बहुत कुछ बेकार होता है
बड़ा अजीब खेल खेलता है खेलने वाला
दिन भर बारिश में भीगता रहा छाता ठीक करने वाला
जो तुम सपना देखते हो
वह तुम पा भी सकते हो।
वक्त किसी का उधार नहीं रखता..
जो दोगे वो सूद समेत वापिस मिलेगा..!!
हिंसा और अज्ञानता के
मकड़जाल को शिक्षा
की छड़ी से
साफ़ किया जा सकता है।
कैलाश सत्यार्थी
लगाव कैसा भी हो,,आखिर मेंदुख का कारण हीं बनता है...!!
जीवन बड़ा नीरस सा हो गया है,वापसी कि आस तेरी अब भी है.