सिर्फ मेरा दिल ही जानता है कि
ये तुम्हें खोने से कितना डरता है
चढ़ते हैं चढ़ाइयाँ बनाकर सीढ़ियाँ जिन काँधों पर,
फतह होते ही मंज़िल लतियाकर गिरा देते हैं लोग.
अंशुओ का शायद इसीलिए कोई रंग नहीं होता
क्योंकि जब ये आते है तब कोई संग नही होता
यदि लक्ष्य न मिले तो रास्ते बदलो लक्ष्य नहीं,
क्योंकि वृक्ष अपनी पत्तियाँ बदलते है जड़ें नहीं...
इस ज़माने में मोहब्बत दिमाग का धंधा है,जो करते हैं दिल से कारोबार उन्हीं का मंदा हैं..!!
इस संसार में सबसे सुखी वह व्यक्ति है,
जो अपने घर में शांति पाता है...
तुम मेरी वो कमी हो,
जो कोई भी शख्स कभी पूरा नही कर सकता….!!
गीत ग़ज़लों में शामिल गर ना हो सके,
तो तुम्हारे दर्द में बसर हम ज़रूर करेंगे।
नेहा यादव
जिस दिन हम अपनी हद पार करेंगे,
तुम्हे तेरी सल्तनत से भी उठा लाएंगे !!
बिन बताये उसने क्यों ये दूरी कर दी, बिछड़कर उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी ! मेरे मुकद्दर में गम आये तो क्या हुआ , खुदा ने उसकी खुवाईश तो पूरी कर दी !
खामोशी गवाह है,
इंसान अंदर से थक चुका है...
शहर में आ कर पढ़ने वाले भूल गए
किस की माँ ने कितना ज़ेवर बेचा था
तुम रूठना
तो ऐसे रूठना
जैसे माॅं रूठती ही
माॅं मेरी
सुबह की बात
शाम तक भूल जाती है...
सपना गर्ग
विधान को चुनना ज़ुबान को नहीं संविधान को चुनना अज्ञान को नहीं किसान को चुनना निशान को नहीं जवान को चुनना सुल्तान को नहीं ईमान को चुनना बेईमान को नहीं मुस्कुान को चुनना गुमान को नहीं मकान को चुनना मसान...
OTP जैसे लोग,LIC जैसी बातें करते हैं…
आप दुखो को गिनने बैठ जाओगे ,जाहिर है खुशियों की गिनती भूल जाओगे
प्यार की बातें करके, बस हवस मिटाते हैं लोग...
वहम से भी खत्म हो जाते हैं रिश्ते कई बार,
कसूर हर बार गलतियों का नहीं होता ..!!
कुछ आस थी कभी, कभी कुछ वहम था
एक दरिया सा और एक विशाल सागर सा
वो आस भी ले डूबी और वहम भी ले डूबा
कभी गहरी आग सा तो कभी गहरे पानी सा ...
अकेले बैठ कर तुमको कभी जब याद करता हूं ,
मैं रोना मुस्कुराना दोनो साथ करता हूं ..!!