किसी को मनाने से पहले ये ज़रूर जान लेना,कि वो तुमसे नाराज़ है या परेशान ।
हम नफरत भी हैसियत देखकर करते है,प्यार तो दूर की बात है !!!
पहले औरत नसीब लेकर आती थी, अब औरत नसीब देख कर आती है।
बढ़ रहा है ज़िंदगी का कैनवस हर दिन मगर
रंग गहरा अब नहीं दिखता किसी तस्वीर में
राघवेंद्र द्विवेदी
एक अरसे से हमारी बोलचाल बन्द हैफिर भी क्या यादों की आवाजाही बन्द है
चलो एक कप #चाय बनाते हैं ... तुम चीनी बन कर घुल जाना, हम पत्ती बन कर रँग जमाते हैं ...
काश हमारी ज़िन्दगी में वो मंज़र भी आए, तू बैठे मेरी आगोश में और समय थम जाएं..!!
हर शायरी किसी ना किसी के लिये एक गुमनाम खत है..!
जो किसी के घर के पते पर नही मन की,दहलीज पर खुलती है।
….ख्वाहिशों का काफिला भी बड़ा अजीब है
अक्सर गुजरता वहां से है जहां रास्ते नही होते..!!
देखे होंगे आपने महोबत्त के लाखों सपने,
हमने तो बस महोबत्त से आपको देखा है…!!
बेनूर हूँ, बेसब्ज हूँ, मशरूफ़ खुद में हूँ
क़ाबिल नहीं मैं, मेरी अक़ीदत न कीजिये
मन में रखते हीन भावना, पेशे से शुद्ध चाटुकार हैं,
बनते कद्दावर नेता हैं, लेकिन फितरत से गद्दार हैं..!!
ऊँचे मकान खा गए सब मेरे घर की धूप
हिस्से में मेरे रह गई बालिश्त भर की धूप।
सोच का अंधेरा रात के अंधेरे से,
ज़्यादा खतरनाक होता है.....
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट रही है
देखूँ तो एक शख्स भी मेरा नहीं हुआ..!!
धर्म से बड़ा देश होता है। मातृभूमि होती है। सिख धर्म में बाल कटवाना वर्जित है, लेकिन अपने देश के लिये मैं बाल तो क्या गर्दन भी कटवा सकता हूँ। ~ शहीद भगत सिंह
जम्हूरियत पर कस रहा फंदा
ख़ुद को ख़ुदा समझ रहा बंदा
बहलाया-फुसलाया, डराया भी
बॉन्ड से भी जुटा लिया चंदा
चुनाव की बिसात धर्म का दांव
नफ़रत का तूफ़ान कभी पड़े न मंदा
किसी को जेल इनके लिए खेल
इन पर भी चलेगा वक़्त का...
जिसे कोई नहीं सुधार पता,उसे वक्त सुधार देता है…
मेरी दोस्त ने अभी कहा - ये जो लड़कियां होती है ना, इनसे आप थोड़ा दूर रहा करिए!….इनके पास रोने के सिवा कुछ नहीं होता.
लहरों का शोर नहीं, सागर का 'शान्त' सुनो
जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो
प्रह्लाद पाठक