मैं ऐसे धर्म को मानता हूं,
जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए।
डॉ. भीमराव आंबेडकर
लड़कियां बचपन में उतने नखरे नहीं करती, जितना गर्लफ्रेंड का पद मिलने के बाद करती हैं
और ,फिर मेरा खुद को संभाल के संभल जाना ही इस आधी अधूरी प्रेम कहानी का अंत होगा।
बाद में खुलकर जी लूंगा,
ये खुद को समझता रहा
जिम्मेदारियां आती रहीं
और शौक जाता रहा...
तड़प मेरे बेकरार दिल की कभी तो असर उन पे भी करेगी..... कभी तो वो भी जलेंगे इसमें जो आग दिल मे दहक रही है....
जिनके पास लक्ष्य नहीं होता,
उनका मन उन्हें फालतू कामों
और तनाव में उलझा कर रखता है।
आँखों से निकले हर आँसू कोतलाश होती है अपनी एक मुस्कान की …
-मधुलिका
गम नहीं तुझे पा नहीं सके….खुशी है इश्क हुआ…..तुझसे हुआ , और लाज़वाब हुआ..!!
किसी को टूटने की हद तक दबाना भी ठीक नहीं है।
उम्मीद ज़िंदा रखिए आज हंसने,वाले लोग कल तालियां भी बजाएंगे….
बारात में #नोटों की गड्डी उड़ाने वाले #लोग #पूजा की #आरती के लिए खुल्ले #पैसे ढूंढते हैं अभी हमे बहुत बदलना है
चांद नहीं, सूरज नहीं,एक छोटा सा ख्वाब मांगा था,इक उम्र नहीं, कुछ साल नही,दो पल का साथ मांगा था,कोई नाम नही, कोई लफ्ज़ नही,बस इक एहसास तो मांगा था।।
न हो सका तुमसे इतना भी,कुछ ज्यादा नहीं…बस बेकरारी में करार मांगा...
कितनी भी जान छिड़क लो…
बदलने वाले बदल ही जाते हैं!!!
गहराई ढूंढते है मेरे शब्दों में अब तुम..मैने दरिया में उतरना ही छोड़ दिया…
हर व्यक्ति के जीवन में कोई कमी जरूर रह जाती है।
ताकि वह समझ सके कि दुनिया इंसान नहीं
ऊपर वाला चलाता है !
क्या कहें किस कदर किसे खोने से डरते हैं,
यही बात है,के अब किसी के होने से डरते हैं...!!
तुम्हारे अंदर जितना दर्द हैं,
बेशक उतना ही इश्क़ भी रहा होगा !
आखिर थक हार के लौट आये हम बाजार से, यादो को बंद करने के ताले कही मिले नहीं !!
इस दुनिया में सब कुछ कीमती है, एक पाने से पहले और दूसरा खोने के बाद । ~ गुलज़ार
जैसे जैसे दुनिया समझ आने लगती है,
“विश्वास” शब्द खोखला लगने लगता है