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वफा के रश्मों रिवाजों को बहुत देखा जमाने में निभाने का हुनर तो बस किताबों में होता है.. प्रज्ञा शुक्ला

“मेरे देश के रिश्ते कमाल हैं, मेरे देश का दान-धर्म कमाल हैं, मेरे देश का खून कमाल हैं…”, यह कहना है, मेरी एक विदेशी दोस्त का।आप बताएं के हमारे देश में और क्या-क्या कमाल हैं? भारत देश महान है ❣️

अजीब होती है इंसान की फितरत निशानियों को महफूज़ रखकर इंसान को खो देते हैं।

मेरा दुख दर्द महज़ आपके लिए,मनोरंजन एवं बकवास का विषय है.

एक तरफ दुनियाँ चांद पर भी जा रहीं है, दूसरी तरफ जाति से बाहर विवाह नही होता !

रिश्तों को जेबों में नहीं दिलों में रखिए …

जुल्म इतना बुरा नहीं जितनी बुरी तुम्हारी ख़ामोशी है !जुल्म के खिलाफ बोलना सीखो !!वरना तुम्हारी पीढ़ियां गूंगी हो जाएंगी !!

सवाल अहंकार का नहीं, इज़्ज़त का रखो.. कोई अगर लहज़ा बदले, तो तुम रास्ता ही बदल लो..!!

अधूरापन कभी खत्म ही नहीं होता, कभी आंखें नहीं होती तो कभी काजल..!!

सुनो दोस्तों पैसा इतना कमाओ की, चार लोग तुम्हे अपना दामाद बनाना चाहे...

उम्मीद ना कर किसी से इस दुनिया में हमदर्दी की... बड़े प्यार से जख्म देते है शिद्दत से चाहने वाले...!!

फिर हमनें अपनी आंखो को सजाया है तुम्हारे लिएतुम अपना दिल कब सजाओगे मेरे लिए....!!

चल ज़िन्दगी नई शुरुआत करते हैं, जो उम्मीद औरों से की थी वो अब खुद से करते हैं !!

चार दिन भी कोई दूसरा निभा नहीं सकता, जो किरदार पापा जिंदगी भर निभाते हैं!!

सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना,पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है.!

जो मनुष्य अपनी निंदा सह लेता है, उसने मानो सारे जगत पर विजय प्राप्त कर ली।

वही ज़िद वही हसरत, ना दर्द-ए-दिल की कमी हुई अजीब है मोहब्बत मेरी, ना मिल सकी ना ख़त्म हुई

मैंने कब कहाकोई मेरे साथ चलेचाहा ज़रूर! सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

यह तन विष की बेलरी, गुरू अमृत की खान। कबीरदास

जब शिकार का वक्त आएगातब, हम जंगल मे जरूर आएंगे..


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