चार चार बेटियां विदा हो जाती है खेल कूद कर,
और बहुएं आते ही नाप देती है, कि घर बहुत छोटा है।
कुछ किताबे ताउम्र धूल फाँकती रह जाएगी,
एक रुपया ही सही किसी का तुम पर उधर रह जाएगा,
कुछ कपड़े बिन पहने ही अलमारी मे दबे रह जाएँगे,
किसी अपने से मुलाकात अधूरी रह जाएगी,
किसी खास से दिल की बात कभी कह नहीं...
अपनी खुशी के मालिक खुद बनो , वरना यहां दिल दुखाने वाले बहुत हैं ...
दुर्घटना तो जन्म है
मृत्यु तो घटना का अंत है
यूं तो दिखावे के लिए लोग बहुत ही दिल से मिलते हैं पर जो दिल से मिलते हैं वो बड़ी मुश्किल से मिलते हैं !!!
एक छींक की तरहआ जाएगी मृत्युजेब में रूमाल तक नहीं होगा...
किसानों को नहीं रोक पाई कीलें ,
बैरिकेड को तोड़ दिया किसानों ने , अब
लगता है हमारे देश के 'नैया' किसान ही
पार करवाएंगे , जय जवान जय किसान
पुरुष पेड़ पे लगे उन पत्तो कि तरह होते है,
जिन्हे धूप तो मिलती है पर छाँव नहीं..
जय किसान - जय युवा !!
योजना के बिना
लक्ष्य सिर्फ इच्छा है
पवर पहचान बना सकती है
सम्मान चाहिए तो कर्म करो।
तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहींकमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं
~ दुष्यंत कुमार
जाती है सबकी नज़र तुम्हारी ही तरफ,
सब्जी़ मंडी में टमाटर जैसी हो तुम ।।
तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....
ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं,
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं.
आलोक श्रीवास्तव
नशा दौलत का नहीं कामयाबी का रखो ,ज़िद मोहब्बत की नहीं मंजिल की रखो ।
बड़ा अजीब खेल खेलता है खेलने वाला
दिन भर बारिश में भीगता रहा छाता ठीक करने वाला
मुझको मजबूर न कीजिएगा अदाकारी पर ,
मैं जो किरदार में उतरा तो क़यामत होगी ..!!
खुशियां खत्म हो चुकी मेरे जीवन से,
मैं अवसादों का रहगुजर हूं,
और जिसे कोई नहीं तराश सकता,
मैं वो मानव निर्मित पत्थर हूं..