इश्क़ और तबियत का कोई भरोसा नहीं मुर्शिद , मिजाज़ से दोनों ही दगाबाज़ हैं ..!!

माँ होना आसान नहीं…पिता बनना और कठिन है..!!

छुड़ा के उंगली पापा ने सलाह दी, अकेले चला कर बेटे सहारे ठीक नहीं होते...

पिता की दौलत नहीं, केवल उसका साया ही काफी होता है...

एक तरफ है खामोशी एक तरफ है बरसो का इंतज़ार, फिर भी ऐसी मोहब्बत का एक अलग ही रुतबा और सुकून...

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