न चन्द्रमुखी न पारो२ पेग मारो और जिन्दगि आराम से गुजारो !!

नींद से इतना भी प्यार न करो कि मंज़िल भी ख्वाब बन जाए !

जुल्म इतना बुरा नहीं जितनी बुरी तुम्हारी ख़ामोशी है !जुल्म के खिलाफ बोलना सीखो !!वरना तुम्हारी पीढ़ियां गूंगी हो जाएंगी !!

बदल दिया है किरदार अपना इस फरेबी दुनिया में, वास्ता वजूद से हो जाए तो साथ छोड़ना पड़ता है..!!

आखिर थक हार के लौट आये हम बाजार से, यादो को बंद करने के ताले कही मिले नहीं !!

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