गहने, झुमके, कंगन के बिना भी मैं तुम्हें सजा सकता हूं मैं शायर हूं, अपने लफ़्ज़ों से ही तुम्हें दुल्हन बना सकता हूं

प्रेम तो आज भी उसी रुप उसी मिठास में है बस उसे निभाने वाला मनुष्य ही अधिक समझदार हो गया है। राजेश गौरी

इंतजार रहेगा जिंदगी के आखरी पन्नो कासुना है आखिर में सब ठीक हो जायेगा

पसंद उसे कीजिए जो आप में परिवर्तन लाये,वरना प्रभावित तो मदारी भी कर लेते हैं..!!

अपने सपनों को साकार करने कासर्वश्रेष्ठ तरीका है कि आप जाग जाएं…

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