अधूरे किस्सों कीलिखावट हमपूर्ति की प्यास मेंतलाशते रहें दर बदर मकामचंद लम्हों की लिखावट के बादहो गया अल्पविरामहोगा ना शायदकुछ किस्सों काकभी भी पूर्णविराम….
संबंध बनाना,ऋण लेने जैसा आसान है.!किन्तु संबंध निभानाकिश्तें भरने जैसा कठिन है..!!
मुकद्दर में लिखीकोई बात हो तुम,तकदीर की एकखुबसुरत सौगात हो तुम,करके प्यार तुम्हेंमहसूस किया जैसे,सदियों से यूं हीमेरे साथ हो तुम..!
पिता की बनियान में बने झरोखे ,..संतान के उड़ान की मयस्सर खिड़कियां है !!