कौन था जिसे दुःख सुनातेआईने पर सर रखा और रो दिए

गेम चेंजर बनो दोस्तक्योंकि दुनिया पहले ही खिलाड़ियों से भरी पड़ी है!

दुःख में उपस्थित रहने वाले व्यक्ति, सर्वदा सम्मान के पात्र होते है। -तरुण श्रीवास्तव

दिखावे के शरीफ बनने की आदत नही हमारी,..शब्द चाहे जैसे भी हो खुलेआम बोलते है हम..!!

अगर अंधे आदमी को दिखने लग जाए तो वो सबसे पहले अपनी छड़ी को फेंकता है,जिसने हमेशा उसका साथ दिया.!!

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