रूह में बसा हुआ शख्स,दिल से कभी नहीं निकलता….

स्त्रीतत्व को छूना भी एक कला है,स्त्री काया नहीं हृदय है..

अभी हम उठे ही कहाँ जो तूफ़ान देखेगा इक दिन झुक के हमें आसमान देखेगा अम्बष्ठ

नए गुन्हा किए तुम ने पुराने छुपाने के लिएतुम ने इश्क़ फिर कर लिया हमे भुलाने के लिए…!!

घास बड़ी होती हैतो आपस में दोस्त हो जाती है पेड़ बड़े होते हैं तो अकेले हो जाते हैं….. ~ लीलाधर जगूड़ी

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