इबादतों में मसरूफ़ हैं सभी आजकल
दिलों को तोड़कर सजदों में रोया जा रहा हैं..
सुना आज एक झुठल पार्टी का
तोतला प्रवक्ता कूट दिया गया
एक लात पड़ी थी तो पूरा देश सर पर उठा लिया
गर्दन कट गई तो सन्नाटा है...!
इस सन्नाटे को में क्या नाम दू....?
पुराना विवाद
आपसी रंजिश
पैसे की लेती देती
या फिर....
भाई चारा....
या फिर....
दलाली....???
तुम्हारी एक मुस्कान से सुधर गई तबियत मेरी ,
बताओ यार इश्क़ करते हो या इलाज़ करते हो ।।
ख़्वाहिशे ही तो हैं
मन के भीतर
कितनी मासूमियत से पनपती हैं
उचक उचक कर
शिशु की भाँति लगाती हैं पुकार
पूर्णता को पाने के लिये पैर पटकती हैं
चाहत होती है के सब पा लें
सहज़ ही
मगर कहाँ इतना सहज़ है
इनकी ही तरह सहज़...