ऊंची मीनारों पर बैठ जाने से, कबूतर कभी बाज नहीं बनते...

आग लगाऊं मैं तेरी डिग्रियों को, एक मेरा दिल तुझसे पढ़ा ना गया..

पहले लगता था कि.... तुम ही दुनिया हो... अब लगता है कि.... तुम भी दुनिया हो....!!!

सर जिनके सलामत हैं,वो शर्मिंदा तो होंगे, याद आएगा जब उनको कि दस्तार कहाँ है? ~ अभिषेक शुक्ला

दूर होने के फ़ैसले, काफ़ी क़रीब आ जाने के बाद लिए जाते हैं.

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