मैं झुक तो जाऊं, मुझे पता है मसला हल हो जाएगा,..मगर इससे मेरे किरदार का क़त्ल हो जाएगा…

डूबने ही वाला था उसकी झील सी आंखों में,मगर वहां पहले से कई मगरमच्छ बैठे थे ...

जाने क्या बिगाड़ा है इस बनाने वाले नेहम बनते बनाते अनजान बन जाते हैं !!

उदास लम्हों में बस चाहिए अकेलापनदिलासा देते हुए लोग ज़हर लगते हैं अक्श समस्तीपुरी

तस्वीर तो है ही तुम्हारी है तारीफ-ए-काबिलउससे भी ज्यादा कातिल है होंठों के नीचे ये काला तिल🧚🏻‍♀️

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