मां ममता की मूरत बन गयी,पिता संघर्ष के प्रतीक रह गए।चोट लगी तो मां के अश्रुधार बहे,पिता मौन में दुःख को सह गए।।

बेशक उठाओ उंगली मेरे किरदार परमगर शर्त ये है कि उंगली बेदाग होनी चाहिए

जरा भी असर नहीं होता मुझ पर इन सांपों के ज़हर का, मैंने अपनी जवानी में एक मशहूर नागिन को मुंह लगाया था !

काश एक शायरी कभी,तुम्हारी कलम से ऐसी भी हो,जो मेरी हो मुझ पर हो और,बस मेरे लिए ही हो..!!

किस्मत के सहारे मुझे ना छोड़ना मेरे "कान्हा,मुझे तेरी दया के सिवा किसी पर यकीन नही है.

Translate »