बईमानी भी तेरे इश्क ने सिखाई है,तू पहली चीज है जो मेने मां से छुपाई है

नफरत का बाज़ार ना बन, फूल खिला तलवार ना बन,रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल, रस्ता बन दीवार ना बन- राहत इंदौरी

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे, एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोहे- कबीर

परेशानी यह नहीं की दिन बुरे चल रहें, मसला ये है कि दिन भी जवानी के हैं ..!!

हुए बदनाम मगर फिर भी न सुधर पाए हम , फिर वही शायरी फिर वही इश्क फिर वही तुम ..!!

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