तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ, मैं कि तू मिल भी अगर जाये तो अब मिलने का ग़म होगा - वसीम बरेलवी
धर्म से बड़ा देश होता है। मातृभूमि होती है। सिख धर्म में बाल कटवाना वर्जित है, लेकिन अपने देश के लिये मैं बाल तो क्या गर्दन भी कटवा सकता हूँ। ~ शहीद भगत सिंह
बईमानी भी तेरे इश्क ने सिखाई है,तू पहली चीज है जो मेने मां से छुपाई है
नफरत का बाज़ार ना बन, फूल खिला तलवार ना बन,रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल, रस्ता बन दीवार ना बन- राहत इंदौरी
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे, एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोहे- कबीर