‘’शोक मत करो ! नहीं उतरेगा कोई भी उत्सव
बुलावे पर उनके लाल क़ालीनों पर
करेंगे सारे उत्सव प्रतीक्षा
न्योते की तुम्हारे रोककर साँसें अपनी
बस करना होगा थोड़ा सा इंतज़ार”
गांव बदलकर शहर हो रहे हैं,
और इंसान बदलकर जहर हो रहे हैं…
समझदार इंसान वही है जिसे पता है
कब और कहाँ कितना
बेवक़ूफ़,
मासूम और असहाय दिखना है
बुरा वक्त भी कमाल का होता हैं,
जी जी कहने वाले भी तू तू कहने लगते हैं…
कृष्ण जिसे नहीं मिले,
युगों युगों से आजतक उसी के हैं,
और जिसे मिले उसे मिले ही नहीं।
तभी कहते है, कृष्ण को
पाने का प्रयास मत कीजिये,
पाने का प्रयास करोगे
तो कभी नहीं मिलेंगे।
बस प्रेम कर के छोड़ दीजिए,
फिर जीवन भर साथ...