एक दिन ऐसे भी जीना हैं ..
जी भर के पीना हैं ,सारे दुखों को भुला देना हैं ,जब तक होश ना खो दूँ,हाँ ! मुझे भी शराब पीना हैं ..
कभी कभी बहुत ग़ुस्सा आता हैं ख़ुद पर ,मैं जैसे हूँ वैसे क्यों हूँ ?
सब कुछ चुराया जा सकता है।
पर दुनिया में कोई किसीका इरादा नहीं चुरा सकता।
खुदा से कहां कुछ छिपा है कभी मोहतरमा,मैं तुमसे दूर हुआ इसमें भी रजा उसी की थी..!!
क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआजहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआमेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआबताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या-क्या हुआम्म हम्म, खामोशियाँ एक साज़ हैंतुम धुन कोई लाओ ज़रा….