"उम्मीद" ही होती है शायद गम की वजह….वरना ख्वाहिशें रखना कोई "अपराध" तो नहीं..!

बुलंदियों का नशा हमने देख रखा है….बड़ा मुुश्किल है आसमां पे ज़मीर साथ रखना..!

छुप छुप कर क्यूँ पढ़ते हो अलफाजों को मेरे,सीधे दिल ही पढ़ लो सांसों तक तुम ही हो..!!

तकलीफ़ों से लदे तजुर्बे…अक्सर बेज़ुंबा रहते हैं.!

मेरे बस में नहीं हैं खुले आसमान में उड़ना ,इसलिए मैंने अपने पिंजड़े को ही अपनी दुनिया मान लिया हैं ..

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