अपनी खुशी के मालिक खुद बनो , वरना यहां दिल दुखाने वाले बहुत हैं ...

मोहब्बत जुदाई बर्दाश्त कर सकती है , मगर बेइज्जती नहीं ...

समझदारी दिमाग में होनी चाहिए,और दिल में बचपना.

कभी खुदा से मिला तो जरूर पूछूंगा,ग़ुलाब' कितने लगे थे तुम्हें बनाने में...

और ,फिर मेरा खुद को संभाल के संभल जाना ही इस आधी अधूरी प्रेम कहानी का अंत होगा।

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