दौलत के नशे में यूँ लड़खड़ाते हैं कुछ लोग, गिरते गिरते हद से गिर जाते हैं कुछ लोग !!

इश्क है अगर तो शिकायत न कीजिए... और शिकवे हैं तो मोहब्बत ना कीजिए..!!

अम्बर हिले धरा डोले , पर हम अपना पथ न छोडें सागर सीमा भूले , पर हम अपना ध्येय न छोडें ||

जब-जब धर्म की ग्लानि-हानि यानी उसका क्षय होता है और अधर्म मे वृद्धि होती है, तब-तब मैं धर्म के अभ्युत्थान के लिए अवतार लेता हूं !!

ये चार दिन की जिन्दगी, किस किस से कतरा के चलूं, खाक हूँ मैं…खाक पर…क्या खाक इतरा के चलूं...

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