बड़प्पन देखिये मेरे अपनो का, मुझे छोटा दिखाने पर तुले हैं..
तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
सजा मे तुम मिलोगे तो बोलो , गुनाह क़बूल कर लूँ ..!!
तू सच बोलने का इरादा तो कर, बिरह काटने का हौसला है मुझ में.
तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!