लंबी छलांगों से कहीं बेहतर है निरंतर कदम,जो एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएगा !!

रोज़ इतने लोग मरते हैं,पता नहीं,मैं क्यों बच जाता हूं..!!

हम भी दरिया हैं,हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ भी चल पड़ेंगे,रास्ता हो जाएगा. बशीर बद्र

तुम हाथ थाम लेते होमैं चल पड़ती हूँ तुम नज़र भर देखते होमैं मुस्कुरा देती हूँ तुम क़रीब आ जाते होमैं शरमा जाती हूँ तुम आग़ोश में भरते होमैं सिमट जाती हूँ तुम माथे को चूम लेते होमैं समर्पित हो जाती हूँ

ग़ैरों की बात छोड़िए, ग़ैरों से क्या गिलाअपनों ने क्या दिया हमें, अपनों से क्या मिला। ~ कैफ़ी आज़मी

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