कब कौन समेटता है यहाँ,खुद तोड़ कर पूछते है महफूज तो हो तुम…

पत्थर दिल बनना मेरी मजबूरी है ,अगर में भीखर गया तो कोई मुझे समेट नहीं पाएगा…

मुझे तुम्हारा साथ चहिए,तुम्हारी सलाह नहीं…

गिरने के बाद समझ आया ,यहां चलना भी खुद है संभलना भी खुद है …

स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन और विश्वास सबसे अच्छा संबंध। ~ गौतम बुद्ध

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