कार्यों को प्रारंभ न करना बुद्धि का पहला लक्षण है और प्रारंभ किए हुए कार्य को पूरा करना दूसरा।

जिसके पास जीने का मकसद है वो कुछ भी सहन कर सकता है।

वहाँ कोई महानता नहीं है जहाँ सादगी, अच्छाई और सच्चाई नहीं है।

बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।

कितना अजीब है कि एक जीवन मिला है जो समझ ही बहुत देर में आता है।

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