शिकवे और शिकायतों में क्या रखा है!वक़्त ही कुछ ऐसा है कि….अपनों ने ही अपनों से दूरी बनाए रखा है।

उस रात मैं इसलिए भी बहका……..उनकी तरफ़ से भी कुछ इशारे थे…..!!

कभी ये मत सोचिए कि आप अकेले हो,बल्कि ये सोचिए कि आप अकेले ही काफी है।

ख़्वाहिश है कि ख़ुद को भी कभी दूर से देखूँ !मंज़र का नज़ारा करूँ मंज़र से निकल कर !!

हमेशा सही के साथ खड़े रहो,भले ही अकेला क्यों ना रहना पड़े…

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