आप उदास रहिए कोई हर्ज नहीं,बस उदासी को जीतने न दीजिए.

आसमान जितना नीला है, सुराजमुखी जितना पिला है, पानी जितना गिला है, लगता है स्क्रू उतना ही ढीला है. . .

पहले मन निकलता है सफर पर, तन बाद में.

कष्टों में रोने, और प्रसन्नता में गले लगने को, कम से कम एक कंधा तो सुरक्षित रहना चाहिए !!

उनको हमारी याद ना आयेतो कोई बात नहीं हम जरा सा भूल जाये तो खफा हो जाते हैं

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