लोग हत्या होते देख लेते हैं,प्रेम होते नहीं देख पाते हैं..!

सच को कहाँ होती है तमीज़ बात करने की ,झूठों से सीखो कितना मीठा बोलते हैं …

धूप भी कहां कुछ कर पाया है , जब तक सर पर मां का साया है ।।

घाव के साथ युद्ध लड़ना पड़ेगा,मरने तक तो जिंदा रहना पड़ेगा…

हर रिश्ता इसी कागज़ का गुलाम हैं..जिसे हम पैसा कहते हैं..

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