तुम्हारी हर बात का अर्थ मुझे समझ आता है ,, कान्हा ... इसलिए अब मैं किसी से ,, कोई शिकायत नहीं करती ...

अगर विश्वास खुद पर हो तो, उजड़ी हुई जिंदगी भी खिल जाती है ..!!

मंज़िल से ये कहो... के करे मेरा इंतज़ार ठहरा हुआ जरूर हूँ... भटका नहीं हूँ मैं...

कितना खूबसूरत वो रिस्ता होता है जिसमे साथी ,,, प्रेम करने के साथ साथ सम्मान करने वाला हो..

सुलझी सी कविताएँ लिखते हैं, ख़ुद में ही उलझे से लोग..!

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