मंज़िल से ये कहो... के करे मेरा इंतज़ार ठहरा हुआ जरूर हूँ... भटका नहीं हूँ मैं...

कितना खूबसूरत वो रिस्ता होता है जिसमे साथी ,,, प्रेम करने के साथ साथ सम्मान करने वाला हो..

सुलझी सी कविताएँ लिखते हैं, ख़ुद में ही उलझे से लोग..!

इलाज़ ना ढूंढ तू इश्क़ का, वो होगा ही नहीं, इलाज़ मर्ज़ का होता है इबादत का नहीं..!!

उसे बारिश का मौसम अच्छा लगता था , मुझे उसके साथ बारिश मे भींगना !!

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