बेचारगी पे मेरी उसे प्यार आ गया, शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ उसे भा गया

लत तो मुझे तुम्हारी लगी है..,, वरना ये, शायरी करना मुझे कहा आता है, और इल्ज़ाम बेचारे फ़ोन पर आता है..

वक्त से हारा या जीता नही जाता,केवल सीखा जाता हैं..

जैसा दिल बनाया है, काश वैसा ही नसीब भी बना देता मालिक।।

जब नादान थे तो जिंदगी के मजे लेते थे, समझदार हुये तो जिंदगी मजे ले रही है !

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