जलाकर हसरत की राह पर चिराग़ आरजू के , . . हम तन्हा रातों में तेरे मिलने का इंतज़ार करते हैं...!!

वो फूल जो मेरी कबर पर डालने का आप इरादा रखते है, वो मेरी जिंदगी में ही दे दीजिए खुशी होगी...

बेचारगी पे मेरी उसे प्यार आ गया, शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ उसे भा गया

लत तो मुझे तुम्हारी लगी है..,, वरना ये, शायरी करना मुझे कहा आता है, और इल्ज़ाम बेचारे फ़ोन पर आता है..

वक्त से हारा या जीता नही जाता,केवल सीखा जाता हैं..

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