किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के

दस्तक और आवाज तो कानों के लिए है जो रूह तक सुनाई दे उसे खामोशी कहते है

अकेले आए थे अकेले जाना हैं, तो अकेले रहने से परेशानी कैसी...

छोड़ न देना हमें राह-ए-मोहब्बत में.... ज़माना बड़ा तलबगार है, हमें तन्हा देखने के लिए..!!

8 अरब वाली दुनिया में, एक तुमसे ही तो इश्क़ है ..!!

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