ईमान बेचकर दौलत कमाने वालों से कह दो, फरिश्ते कब्रों में रिशवत नहीं लेते

ये कभी मत कहना कि वक़्त मेरे मुट्ठी में कैद है, मैंने मुंह से वापस निकलते निवाले देखें है

प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।- रवींद्रनाथ टैगोर

पेशे के जुनून भुला देता है तपिश गर्मी की, वक़ील गर्मियों में भी कोट पहन के मुस्कुराता है

शरीर सुंदर हो या ना हो अपने शब्द सुंदर रखिये, इंसान चेहरा नहीं शब्द को याद रखता है..

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