मैं उस किस्मत का सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ,वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए.!!

तू समझा नहीं जिंदगी का मकसद,तू उलझा रहा लोगों की गलती ढूंढने में.

कभी उसे भी तो खले ना मिलना हमारा ,सिर्फ मैं ही क्यों रोयु ,याद करू और गिड़गिड़ाऊं ।।

सुनो कृष्ण!!मौसम हरे रखनाऔर मन गीला

किताबें पढ़कर " विद्वान " बनना बहुत आसान है, लेकिन " नेक इंसान " बने रहना बेहद मुश्किल।

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