मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।कह कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत।।"

पतन पराजय से नहींउसे स्वीकार करने से होता है ~ नरेश सक्सेना

मुझे पल भर के लिए आसमान को मिलना थापर घबराई हुई खड़ी थी…कि बादलों की भीड़ में से कैसे गुज़रूँगी…

पागल ही हूँ मैं जो तेरे शहर में बैठ कर तेरा ही इंतिज़ार करता हूँ…

थक जाता है इंसान "ख्वाहिशें" पूरी होने से पहले,कभी परिस्थितियां मार जाती हैं तो कभी ज़िम्मेदारियां..!!

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