मन्नतों के धागे बांधो या बांधो मुरादों की पर्चीवो अपना नम्बर देगी तभी जब होगी उसकी मर्जी

कुछ तो राज छुपाएं जातें हैं मोहब्बत में यूं ही कोई तीसरा अचानक से नहीं आ जाता जिंदगी में

ये जो मां की मोहब्बत होती है नायह तमाम मोहब्बतों की मां होती है..!!

चांद के टेढ़े स्वरुप ने भी हमेशा प्रेमियों को सीधा प्रेम मार्ग दिखाया है। राजेश गौरी

किससे पैमाने वफ़ा बाँध रही है बुलबुल,कल न पहचान सकेगी गुल-ए-तर की सूरत।

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