किसी अकेली शाम की चुपी मेंगीत पुराने गा के देखो…

दर्द नहीं, "दवा" बनिये….!!आप बशर रहिए, ना खुदा बनिये..!!(बशर- इंसान)

दुख का प्रतीकशायद रोना नहींमौन हो जाना है !!!

जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब केउसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा

खूबसूरत तो औरतें होती हैंहम मर्द तोसिर्फ अमीर या गरीब होते हैं

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