भटका हू जीवन कि राहो मे मंजिल कि कोई ठौर नहीएकाकी जीवन जीता हू मेरे पास खुशियां और नहीतुमको साथ ले चलू तो वह बात आन कि आती हैदुखदर्द, कष्ट तुम भी सहो तब बात सम्मान कि आती है और न...

अभी बहुत रंग हैं जो तुम ने नहीं छुए हैं.... कभी यहाँ आ के गाँव की ज़िंदगी तो देखो....!

शीशे में डूब कर पीते रहे उस जाम को, कोशिशें की बहुत मगर" भुला ना पाए तेरे एक नाम को !!

गुरु के आशीर्वाद से शोभा नगर कि बढ़ाई थी फुलवाड़ी मे भ्रमण करते झलक सिया कि पायी थी मोहित हो गये राम तभी जब दिखी बाग मे जानकी प्रत्यंचा चढ़ाई हासिल की सीता ये बात थी सम्मान की राम जैसा धैर्य सीता सी पवित्रता...

वो जो न आने वाला है ना उससे हमको मतलब था, आने वालों से क्या मतलब आते है आते होंगे..!

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