हमारे भविष्य का आधार आज के यथार्थ, लिए गए निर्णय पर निर्भर करता है..!!

मरहम लगता है उसके ज़ख्मों पर, वो हर भवसागर से तर जाती है, जब बेटे कि पहली तनख्वाह से, मां के सपनों कि साड़ी आती है..!!

जद्दोजहद चार सौ पार की नही... चार सौ बीसी से पार पाने की है।

अच्छा बुरा जैसा भी हूँ पर Original हूँ....!!

सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।

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