ये सांपों की बस्ती है जरा देख कर चल,यहां का हर शख्स बड़े प्यार से डंसता है.

भरोसा बहुत कीमती हैजिंदगी कम पड़ जाती है इसे कमाने में

रूख से हटाकर ये पर्दा हमसे मिला करोहोंने से पहले रूखसत गले से लग जाया करो और मैं किस जुबां में करूँइज़हार तुमसे ये इश्क़ अपना कभी तो यार मेरी इन बेचैनियों सेहाल मेरा समझ जाया करो

लड़कियाँ खिलौना नहीं होती जनाब,पिता तो यूँ ही प्यार से गुड़िया कहते है..

बेकार लगनें लगते हैं मोती कभी कभार… पत्थर से भी इश्क़ हो सकता है इंसान को…!!

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