सबका ख़ुशी से फासला एक कदम हैं ,हर घर में बस एक ही कमरा कम हैं .. ~ जावेद अख्तर

बात नहीं हुई सुबह, सुबह नहीं हुई सुबह से सीधा दोपहर हो गई….

समाज को इतना भी सभ्य नही होना चाहिए,कि प्रेम करता हुआ कबूतरों का जोड़ा लोगों को असभ्य लगे

"तुम!! जानते हो मेरे इस जीवन में सबसे अधिक किसकी जरूरत है-?"पहली लाईन के पहले ही शब्द की.

ना करीब आ , ना तो दूर जा !ये जो फासला है , यही ठीक है..!.ना गुज़र हदों से , ना हद बता !ये जो दायरा है , यही ठीक है..!!

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