सत्य से मीठा कोई फल नहीं,झूठ कितना भी बोलो उसका कोई कल नहीं !!
रूद्र हुँ,महाकाल हुँ,मृत्यु रूप विकराल हुँ,नित्य हुँ, निरंतर हुँ, शांति रूप मे शंकर हुँ,
शांति का श्रृंगार हुँ,मै क्रोध का अंगार हुँ,
घनघोर अंधेरा ओढ़ के मै जन जीवन से दूर हुँ,शमशान मे नाचता मै मृत्यु का गरूर हुँ,
शाम दाम तुम रखोंमै...
मर्द पढ़ा तो ब्याह लाया अनपढ़ को भी ,औरत पढ़ी तो सैकड़ों पुरुषों को नापसंद किया।
~ अज्ञात
शौक़–ए–वफ़ा ना सही,खौफ–ए–खुदा तो रखो।
ये जीवन जिंदगी और मौत के….बीच का एक खूबसूरत सफर है…!!