अगर तुमअपनी सांसों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपनी धड़कनों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपने छूटते प्राण को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अन्यथाजाने दो जिसे जाना है,
मत करो विलाप किसी के जाने का
~ अम्बष्ठ
गांव की मिट्टी के पले बढ़े हैं,हमें अदाएं कम और मर्यादाएं ज्यादा पसंद हैं….
लोग देखते ही रहे कि हमें टूटा हुआ देखें,और हम थे कि दर्द सहते-सहते पत्थर के हो गए।
कहां से लायी हो इतनी खूबसूरत आंखें…सारे जहां की खूबसूरती समेटे हुए..कौन कहता है कि छोटे कपड़ों में ही सुंदर दिखा जा सकता है.. मर्यादा , संस्कारों में रहकर पूरे कपड़ों में भी सिर्फ आंखों से ही चांद सी खूबसूरत...
किसी के लिए जरूरी होना,और फिर गैर जरूरी होनाहाँ , यही तो जिंदगी है…