इजहारे ऐ इश्क महफिल में आंखों ही आंखों में बयां हो रहाकैसे बचाते दिल को जब #कातिल से ही इश्क हो रहा था !!

हम खाली किताब थेलोग आते गए सबक छपता गया

कितनी भी जान छिड़क लो… बदलने वाले बदल ही जाते हैं!!!

एक बार ही बहकती है ये नज़रेकिसी को देख कर….ये इश्क है साहेब सौ बार नहीं होता …

खामोशियां कर दे बयां तो यह अलग सी बात है वरना कुछ अल्फाज लफ्जों में बयां नहीं होते

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