पैसा इंसान के असली रूप को बाहर लता है.

पैसे वालों की चमचागिरी करती है दुनिया, गरीब और मजदूर की सुनता कौन है।

बारात में #नोटों की गड्डी उड़ाने वाले #लोग #पूजा की #आरती के लिए खुल्ले #पैसे ढूंढते हैं अभी हमे बहुत बदलना है

घर वाले जब भी कहते हैं कि भाड़ में जाओ तो मैं चुपचाप आकर फेसबुक पर बैठ जाता हूँ.

यूं तो आदत नहीं मुड़कर देखने की,पर तुम्हे देखा तो ऐसा लगा कि एकबार और देख लूं

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