जब किसान के बेटे कोगोबर में बदबू आने लग जाएतो समझ लो कि देश मे अकाल पड़ने वाला है।

ज़िंदगी जोड़ घटाव से नहीं, प्रेम और लगाव से है।

इच्छाएं स्वार्थी बना देती हैं, वर्ना जरूरतें तो स्वाभिमान में रहकर भी पूरी हो जाती हैं।

किनारा न मिले तो कोई बात नहीं, दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं हैं...

जीवन में उतार से न घबरा चाँद घटने के बाद बढ़ता है

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