मयखाने की इज्ज़त का सवाल था हुज़ूर , सामने से गुजरे तो थोड़ा सा लड़खड़ा दिए

बचपन कि छोटी खुशियां थी, मस्ती, हंसी ठिठौली थी, मिलता अब वो आह्लाद नहीं जो देती आंख मिचौली थी..!!

कैसे करूं खुद को तेरे काबिल ए - जिंदगी, मैं जब आदतें बदलता तू सर्ते बदल देती हैं।।

कुछ लोग जिंदगी से ऐसे जाते हैं जैसे कभी जिंदगी का हिस्सा थे ही नही, दुख इस बात का है की अलविदा कहने तक की ज़रूरत नही समझते.

ईश्वर जिन्हें खून के रिश्ते में बांधना भूल जाता है... उन्हें दोस्त बना देता है.

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