जीवित लोगों से अधिक फूल प्राप्त होते है मृत लोगों को,क्योंकि…आभार से अधिक ताकतवर है अफ़सोस।

ना भरने वाला उम्र भर को घाव हो गया।जिसके भी दिल में प्रेम का ठहराव हो गया।।

दया अगर लिखने बैठूं होते हैं अनुवादित रामरावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम ~अज़हर इक़बाल

उसने पूछा मुझसे "आखिर चाहती क्या हो ?"हमने भी कह दिया "चाहने से चीज़ें मिलती है .. सुकून नही .."

धैर्य बनाकर रखें और मेहनत करते रहें,आपका किस्सा नहीं एक दिन कहानी बनेगी..!!

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