हंसकर जीना ही दस्तूर है जिंदगी का,एक यही किस्सा मशहूर है जिंदगी का...

हमारी खामोशी को हरगिज बुझदिली ना समझा जाये,,,अभी हम तेरे जुल्म और अपने सब्र की इंतहा देख रहे है,,

रूठे हुओ को मनानाऔर गैरो को हसाना हमे पसंद नही...

दर्द का कहर बस इतना सा है,कि आँखें बोलने लगी और आवाज रूठ गई ..

किसी की परवरिश पर उंगली उठाने से पहले स्वयं के संस्कारों का भी आंकलन कर लेना चाहिए...

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